बुधवार–गुरुवार की दरम्यानी रात ठीक 12.10 बजे शहर सामान्य नींद में था, लेकिन बस स्टैंड तिराहा स्थित डीबी मॉल के भीतर चल रही एनएसजी की काउंटर टेररिज़्म मॉक ड्रिल ने पूरे इलाके को हाई अलर्ट पर रखा हुआ था। सुरक्षा कारणों से ट्रैफिक रोका गया था। इसी दौरान सामने से सफेद रंग की अमेज कार (MP07 CJ 1124) आती दिखाई दी।
ट्रैफिक पुलिस के सिपाही रवि कुमार विमल ने जैसे ही हाथ उठाकर कार को रुकने का इशारा किया, अगले कुछ सेकंड में हालात किसी खौफनाक फिल्म सीन में बदल गए। चालक ने ब्रेक की जगह एक्सीलेटर दबा दिया। पहले बैरिकेड उड़ाया, फिर सीधे सिपाही को टक्कर मार दी।
टक्कर के बाद भी कार नहीं रुकी। सिपाही ने जान बचाने के लिए कांच पर हाथ मारा तो चालक ने उसकी गर्दन पकड़कर अंदर खींचने की कोशिश की। धक्का देने पर सिपाही कार के आगे आ गिरा और बोनट पर लटक गया। करीब 100 मीटर तक सिपाही मौत से जूझता रहा। इसके बाद चालक ने अचानक तेज ब्रेक मारे सिपाही बोनट से उछलकर सिर के बल सड़क पर जा गिरा।
घटना यहीं नहीं थमी। चालक कार को रेसकोर्स रोड से गोला का मंदिर की ओर दौड़ाता हुआ भाग निकला। एनएसजी मॉक ड्रिल के बीच सिपाही को कुचलने की कोशिश ने पुलिस को पूरी तरह अलर्ट कर दिया। करीब दो किलोमीटर दूर गोला का मंदिर चौराहे पर एफआरवी-29 ने कार रोकने की कोशिश की, लेकिन बेकाबू कार ने उसे भी टक्कर मार दी।
इसके बाद कार मुरैना रोड की ओर मुड़ गई। आधी रात पूरा शहर पुलिस सायरनों से गूंज उठा। नाकाबंदी की गई और आखिरकार रायरू में एक ट्रक, एफआरवी और बैरिकेड सड़क पर खड़े कर कार को रोका गया। कार के अंदर बैठे थे तीन नशेबाज़ जिनके कुछ मिनटों के सनकीपन ने पूरी पुलिस व्यवस्था को हिला कर रख दिया।
थाने पहुंचते ही नशे का असर उतर गया। तीनों के खिलाफ शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। मेडिकल परीक्षण के बाद गुरुवार को उन्हें जेल भेज दिया गया।







