उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर आज भक्ति, रंग और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। जैसे ही सुबह की भस्म आरती संपन्न हुई, मंदिर परिसर “जय श्री महाकाल” के जयघोष से गूंज उठा और यहीं से पारंपरिक रूप से होली उत्सव की शुरुआत हो गई।
इस विशेष दिन बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार पीले पुष्पों से किया गया, जो बसंत ऋतु और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। गर्भगृह में पंचामृत अभिषेक के दौरान दूध, दही, घी, शहद और शक्कर की धाराओं से भगवान का अभिषेक हुआ, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इसके बाद बाबा को गुलाल अर्पित किया गया, जिसे होली के आगमन का शुभ संकेत माना जाता है।
मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति के साथ उत्साह साफ झलक रहा था। ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनि, वैदिक मंत्रोच्चार और पुष्पवर्षा ने पूरे परिसर को अलौकिक बना दिया। मान्यता है कि महाकाल मंदिर से ही होली की शुरुआत होने पर पूरे देश में पर्व सुख-समृद्धि और शांति के साथ मनाया जाता है।
बसंत पंचमी पर हुए इस दिव्य आयोजन ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में हर पर्व सिर्फ मनाया नहीं जाता, बल्कि आस्था और परंपरा के साथ जिया जाता है।







