इंदौर के परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर 1 करोड़ 31 लाख रुपए की ऐसी ठगी सामने आई है, जिसने ‘डेली प्रॉफिट’ के सपने बेचने वालों की असलियत फिर उजागर कर दी है। 62 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर राजेश शर्मा को वॉट्सऐप ग्रुप में जोड़कर निवेश, कमीशन, टैक्स और सिक्योरिटी एडवांस के नाम पर 12 अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई।
गुस्सा इस बात पर है कि ठगों ने लालच का ऐसा जाल बुना कि एक समझदार, अनुभवी, सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त इंजीनियर भी फंस गए। अगस्त 2025 में मोबाइल पर स्क्रॉल करते-करते एक लिंक दिखा “शेयर मार्केट में डेली प्रॉफिट की गारंटी!” बस एक क्लिक… और खेल शुरू।
पहले भरोसा, फिर भरोसे का कत्ल
शुरुआत हुई 1 लाख रुपए से। कहा गया “सर, छोटा अमाउंट है, देखिए कैसे बढ़ता है।” सितंबर में 11 लाख और डलवा लिए गए। फिर शुरू हुआ असली प्रहार “सर, मुनाफा बड़ा है, निवेश बढ़ाइए… कमीशन दीजिए… टैक्स दीजिए… सिक्योरिटी एडवांस जमा कीजिए।”
धीरे-धीरे 1 करोड़ 31 लाख रुपए 12 खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। और मज़े की बात? एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप में पोर्टफोलियो 1 करोड़ 85 लाख दिखाया जाता रहा जैसे सब कुछ ‘कंट्रोल’ में हो। इंटरफेस भी ऐसा, मानो Paytm Money जैसा भरोसेमंद प्लेटफॉर्म हो।
लेकिन सच्चाई? स्क्रीन पर दिखता मुनाफा सिर्फ एक डिजिटल धोखा था। असली पैसा तो खातों में साफ होता जा रहा था।
यह सिर्फ एक केस नहीं, चेतावनी है
परदेशीपुरा थाना पुलिस ने एक महिला के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। जांच जारी है। लेकिन सवाल बड़ा है—आखिर कब तक ‘डेली प्रॉफिट’ के नाम पर सपने बेचे जाते रहेंगे?
हर बार वही स्क्रिप्ट
पहले लिंक,
फिर वॉट्सऐप ग्रुप,
फिर ‘गुरुजी’ की टिप्स,
फिर फर्जी ऐप,
और अंत में… अकाउंट खाली।
यह खबर सिर्फ गुस्सा नहीं दिलाती, चेतावनी भी देती है। शेयर मार्केट में गारंटी सिर्फ रिस्क की होती है, मुनाफे की नहीं। अगर कोई रोज़ का तय प्रॉफिट देने का दावा करे, समझ लीजिए—वो ट्रेडर नहीं, ठग है।







