इंदौर। शहर के लसूड़िया क्षेत्र से सामने आया एक वीडियो ईंधन चोरी और मिलावट के उस नेटवर्क की परतें खोल रहा है, जिस पर अब तक केवल पेट्रोल पंपों पर संदेह किया जाता था। लेकिन इस बार मामला सप्लाई चेन के बीच से जुड़ा दिखाई दे रहा है। आरोप है कि डिपो से निकलने वाले टैंकर ही रास्ते में अवैध खेल का हिस्सा बन रहे हैं।
वीडियो में खुले मैदान में खड़े टैंकरों से चोरी-छिपे पेट्रोल और डीजल निकालकर चार पहिया और दो पहिया वाहनों में भरते लोग साफ नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि डिपो से रवाना होने के बाद टैंकरों को सुनसान स्थानों पर रोका जाता है, जहां पहले ईंधन निकाला जाता है और फिर उसमें केमिकल मिलाकर दोबारा सप्लाई कर दिया जाता है। इससे उपभोक्ताओं को कम एवरेज और इंजन खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
नगर निगम के वार्ड क्रमांक 35 अंतर्गत बजरंग नगर, तोड़ा तालावली क्षेत्र में इस संगठित नेटवर्क के सक्रिय होने के आरोप लगे हैं। यह इलाका लसूड़िया थाना क्षेत्र में आता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यहां प्रतिदिन बड़े पैमाने पर ईंधन की अवैध निकासी, भंडारण और बिक्री हो रही है, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मांगलिया डिपो से निकलने वाले विभिन्न तेल कंपनियों के टैंकरों से ईंधन निकाला जा रहा है। इनमें HPCL, IOCL और BPCL के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। चोरी किया गया ईंधन बजरंग नगर तोड़ा स्थित शासकीय विद्यालय के पीछे घनी आबादी वाले क्षेत्र में खुलेआम जमा किया जा रहा है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह पूरा खेल एक सरकारी स्कूल के पीछे, रिहायशी बस्ती के बीच चल रहा है। आसपास बच्चों की आवाजाही और बड़ी संख्या में परिवारों के रहने के कारण आगजनी या विस्फोट जैसी बड़ी दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों का दावा है कि गिरोह रोजाना करीब 12 हजार लीटर डीजल-पेट्रोल की चोरी कर उसे मॉल वाहक वाहनों, ढाबों और भारी वाहनों को कम कीमत पर बेचता है।
सूत्रों के मुताबिक इस नेटवर्क में करीब 40 लोगों की सक्रिय भूमिका है। बिना नंबर प्लेट वाले अशोक लीलैंड पिकअप वाहन, मोटर पंप और पाइपों की मदद से ईंधन निकासी और परिवहन किया जाता है, ताकि गतिविधि गुप्त बनी रहे।
प्राथमिक जानकारी में दीनू उर्फ दिनेश डोंगरे और कमलेश राठौर, दोनों सिंगापुर टाउनशिप, गोल चौराहा क्षेत्र के निवासी, के नाम सामने आए हैं। आरोप यह भी है कि इस अवैध कारोबार में नाबालिग लड़कों को लालच देकर शामिल किया जा रहा है, जो बाल संरक्षण कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।
स्थानीय नागरिकों ने विद्यालय प्राचार्य, लसूड़िया थाना और डायल-112 सहित विभिन्न माध्यमों से शिकायतें दर्ज कराई हैं। हालांकि अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होने से क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। कुछ शिकायतकर्ताओं ने धमकियां मिलने का भी आरोप लगाया है, जिसके कारण कई लोग खुलकर सामने आने से डर रहे हैं।
पूरे मामले में खाद्य आपूर्ति विभाग और नापतोल विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ईंधन की शुद्धता और माप-तौल की निगरानी की जिम्मेदारी इन्हीं विभागों की है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल पेट्रोल पंप स्तर की गड़बड़ी नहीं बल्कि डिपो से सप्लाई चेन तक फैले एक संगठित माफिया नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इस नेटवर्क पर कार्रवाई करेंगे, या फिर रिहायशी इलाके में स्कूल के पीछे चल रहा यह खतरनाक खेल यूं ही जारी रहेगा। शहरवासियों की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।







