मऊगंज में 3 जनवरी को एक साधारण जमीनी विवाद उस वक्त सनसनीखेज घटनाक्रम में बदल गया, जब समझौता कराने पहुंचे स्थानीय विधायक पर जानलेवा हमला कर दिया गया। मामला 30 डेसिमिल जमीन को लेकर पांडे और मिश्रा परिवार के बीच चल रहे विवाद का था। दोनों पक्षों में लंबे समय से तनातनी थी, जिसे सुलझाने के लिए मऊगंज से प्रदीप पटेल मौके पर पहुंचे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, बातचीत के दौरान माहौल अचानक गरमा गया। आरोप है कि कुछ लोगों ने विधायक पर डीजल डालकर उन्हें आग के हवाले करने की कोशिश की। घटना के बाद अफरा-तफरी मच गई। किसी तरह विधायक को वहां से सुरक्षित निकाला गया, लेकिन इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए। अगले ही दिन से उनके ‘लापता’ होने की चर्चा पूरे क्षेत्र में फैल गई।
घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी। समर्थकों ने इसे सुनियोजित हमला बताया, तो विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए। स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही, लेकिन विधायक की अनुपस्थिति ने रहस्य को और गहरा कर दिया।
कई दिनों की अटकलों के बाद विधायक के भोपाल में होने की जानकारी सामने आई। खबर मिलते ही दैनिक भास्कर की टीम बीएचएलई क्षेत्र स्थित उनकी बहन के निवास पर पहुंची। यहां परिवार ने उनकी स्थिति को लेकर सीमित जानकारी साझा की, लेकिन इतना स्पष्ट किया कि वे सुरक्षित हैं।
परिवार के अनुसार, घटना के बाद विधायक मानसिक रूप से आहत थे और फिलहाल सार्वजनिक रूप से सामने आने की स्थिति में नहीं थे। बहन ने कहा कि “जो हुआ, वह बेहद डरावना था। जान का खतरा महसूस हुआ। ऐसे में कुछ समय के लिए दूर रहना जरूरी था।”
हालांकि, अब भी कई सवाल अनुत्तरित हैं, हमले की साजिश किसने रची? सुरक्षा में चूक कहां हुई? और क्या यह सिर्फ जमीन विवाद था या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रंजिश?
जमीनी विवाद से शुरू हुई यह कहानी अब सियासी गलियारों में बड़े मुद्दे का रूप ले चुकी है। पुलिस जांच की दिशा और विधायक की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार पूरे क्षेत्र को है।







