नई दिल्ली। देश की राजधानी में आज तकनीक और भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बड़ा मंच सजा। भारत मंडपम में आयोजित ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ के चौथे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए, इस पर किसी का मोनापॉली या एकाधिकार नहीं होना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में AI की रफ्तार और उसके पैमाने को “अकल्पनीय” बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से हमें जिम्मेदार सोच भी विकसित करनी होगी। “हमें बड़े सपने देखने होंगे, लेकिन जिम्मेदारी के साथ,” उन्होंने कहा। पीएम ने इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि मानवता ने परमाणु ऊर्जा के जरिए विनाश भी देखा है और समाधान भी। इसलिए AI के साथ भी वही संतुलन जरूरी है, नवाचार और नैतिकता का संतुलन। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि हम आने वाली पीढ़ी के लिए कैसा AI छोड़कर जा रहे हैं और आज हम इसका उपयोग किस दिशा में कर रहे हैं। उनके शब्दों में एक स्पष्ट संदेश था, AI विकास का केंद्र इंसान होना चाहिए, बाजार नहीं।
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समिट के मंच से सुंदर पिचाई ने भी AI को लेकर साहसिक दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि AI को सभी के लिए उपयोगी बनाने के लिए निर्णायक और साहसिक कदम उठाने होंगे। “यह तकनीक अरबों लोगों की जिंदगी बेहतर बना सकती है,” पिचाई ने कहा, और साथ ही जिम्मेदार विकास की जरूरत पर भी जोर दिया। 20 फरवरी तक चलने वाली इस समिट में 110 से ज्यादा देशों की भागीदारी ने इसे वैश्विक स्वरूप दे दिया है। 20 से अधिक देशों के प्रमुख, 30 अंतरराष्ट्रीय संगठन और 500 से ज्यादा वैश्विक AI लीडर्स इसमें शामिल हैं। इसके अलावा करीब 100 CEOs और फाउंडर्स, 150 अकादमिक और शोधकर्ता, 400 CTO और वाइस प्रेसिडेंट, तथा 100 से अधिक सरकारी प्रतिनिधि इस मंच पर मौजूद हैं।
जैसे-जैसे समिट आगे बढ़ रही है, दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यहां से AI के भविष्य के लिए कोई साझा वैश्विक दिशा निकलती है, एक ऐसी दिशा, जो तकनीक को ताकत भी दे और मानवता को सुरक्षा भी।







