रीवा शहर एक बार फिर शर्मसार है। चमकते मोबाइल स्क्रीन और मीठी चैटिंग के पीछे छिपा वह दरिंदा आखिरकार बेनकाब हो गया, जिसने “दोस्ती” और “जन्मदिन” जैसे पवित्र शब्दों को अपनी हवस की भेंट चढ़ा दिया।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म Instagram पर शुरू हुई बातचीत ने एक मासूम किशोरी को ऐसे जाल में फँसाया, जहाँ भरोसा ही उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया। 27 फरवरी की रात जो खुशियों, केक और मुस्कुराहटों की होनी चाहिए थी वह चीखों, डर और टूटे विश्वास की गवाह बन गई।
आरोपी ने बड़ी चालाकी से “सरप्राइज बर्थडे सेलिब्रेशन” का झांसा दिया। किशोरी घरवालों से सहेली के यहाँ जाने की बात कहकर निकली, लेकिन उसे क्या पता था कि वह एक ऐसे शिकारी से मिलने जा रही है जो पहले से ही जाल बिछाकर बैठा था। केक काटने के बहाने बुलाया गया, और फिर उसी बहाने उसकी अस्मिता को रौंद डाला गया।
देर रात जब किशोरी घर लौटी, तो उसके चेहरे पर जन्मदिन की चमक नहीं, बल्कि खौफ की परछाई थी। रोते-रोते उसने जो कहानी सुनाई, उसने परिवार की रूह तक हिला दी। घर के पैरों तले जमीन खिसक गई और उसी पल तय हो गया कि दरिंदे को बख्शा नहीं जाएगा।
परिजन तुरंत थाने पहुँचे। शुरुआत में पीड़िता सदमे में थी, घटना स्थल और आरोपी की पूरी जानकारी नहीं दे पा रही थी। लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। शहर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ा गया, और आखिरकार वह चेहरा सामने आ गया जो ऑनलाइन “दोस्त” बनकर भरोसा जीत रहा था और ऑफलाइन हैवान बन चुका था।
महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ। आरोपी किशोर जो बिछिया क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है अब पुलिस की गिरफ्त में है। पूछताछ जारी है, और कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। स्क्रीन के उस पार बैठा हर “दोस्त” दोस्त नहीं होता। हर “हैप्पी बर्थडे” के पीछे खुशी नहीं होती। अब सवाल सीधा है कब तक मासूमियत डिजिटल जाल में फँसती रहेगी? कब तक हवस दोस्ती का मुखौटा पहनती रहेगी?







