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जंगल की गुफा से सत्ता के गलियारों तक: उत्तम स्वामी की यात्रा

सलकनपुर देवीधाम से करीब 10 किलोमीटर दूर, ऊंचाखेड़ा गांव के पास घने जंगलों के बीच स्थित है टाटम्बर स्वामी महाराज का शांत आश्रम। आज भी यहां हवा में वही सन्नाटा है, लेकिन इस सन्नाटे में एक कहानी गूंजती है एक ऐसे किशोर की, जो आठ साल पहले महाराष्ट्र से तीर्थयात्रियों के साथ यहां आया था।

साथी आगे बढ़ गए, लेकिन वह किशोर रुक गया। आश्रम की सेवा में जुट गया। झाड़ू लगाना, रसोई संभालना, गुरुजी के लिए जल लाना दिनचर्या तपस्या बन गई। कुछ ही दिनों में उसने टाटम्बर महाराज से अपनी मनोकामना कही “गुरुजी, मेरी इच्छा है कि मैं अपना अन्न क्षेत्र खोलूं। मुझे क्या करना चाहिए?” गुरु का जवाब संक्षिप्त था “अन्नपूर्णा की साधना कर, तेरा उद्देश्य पूरा होगा।”

वह किशोर कोई और नहीं, बल्कि आगे चलकर चर्चित संत बने उत्तम स्वामी थे। आश्रम के प्रमुख त्यागी महाराज, जो उनके गुरु भाई बताए जाते हैं, बताते-बताते अचानक चुप हो जाते हैं। उनके शब्दों के बाद लंबी खामोशी छा जाती है “करीब एक साल यहां रहे… फिर कहां गए, मुझे नहीं पता…”यहीं से शुरू होती है एक ऐसी कहानी, जो साधना से सत्ता तक पहुंचने की दास्तान बन गई।

साधु से साम्राज्य तक: 28 साल में कैसे बदली किस्मत?

कभी जंगल की गुफा में पत्ते खाकर साधना करने वाले उत्तम स्वामी ने अगले 28 वर्षों में ऐसा सफर तय किया, जिसने सबको चौंका दिया। धीरे-धीरे उनका नाम फैलने लगा। कथाओं, भंडारों और बड़े धार्मिक आयोजनों के जरिए उनका प्रभाव बढ़ता गया।

स्थानीय नेताओं से लेकर सांसद-विधायकों तक, उनके दरबार में हाजिरी लगाने लगे। आशीर्वाद की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाने लगीं। आश्रमों का विस्तार हुआ, जमीनें जुड़ती गईं, और श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में पहुंच गई।

आज तस्वीर बिल्कुल अलग है। जहां कभी एक किशोर सेवा में लीन था, वहीं अब रेंज रोवर और डिफेंडर जैसी लग्जरी गाड़ियों का काफिला उनके साथ चलता है। भव्य मंच, हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम और राजनीतिक समीकरण सब कुछ इस आध्यात्मिक सफर का हिस्सा बन चुका था। लेकिन इसी चमक-दमक के बीच अब एक गंभीर आरोप ने इस पूरे साम्राज्य को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। उत्तम स्वामी पर रेप के संगीन आरोप लगे हैं। समर्थक इसे साजिश बता रहे हैं, तो विरोधी इसे सच की परतें खुलने की शुरुआत कह रहे हैं।

सवाल यह है क्या यह कहानी एक साधक के उत्थान की है, या फिर आस्था की आड़ में खड़े होते साम्राज्य की? जंगल के उस शांत आश्रम से उठी यह कथा अब अदालत और आरोपों के बीच नया मोड़ ले चुकी है। आगे क्या होगा यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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