आज हम आपको एक ऐसी गिरफ्तारी की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि दक्षिण भारत से लेकर मरुधर की धरती तक फैली आठ राज्यों की पुलिस की नींद उड़ा रखी थी। एक ऐसा नाम, जिसके खाते में चोरी और डकैती के 81 संगीन मामले दर्ज थे। पुलिस की आंखों में धूल झोंकने में माहिर यह ‘मोस्ट वांटेड’ डकैत सरगना आखिरकार कानून के शिकंजे में कैसे आया? चलिए जानते हैं टांडा के जंगलों से शुरू हुए इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की पूरी कहानी।
घटनाक्रम की शुरुआत 4 फरवरी को हुई, जब पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली। खबर पक्की थी कुख्यात अंतरराज्यीय डकैत सरगना रमेश चौहान अपने गांव पिपलदिलया के पास किसी बड़ी डील की फिराक में है। टांडा पुलिस ने बिना समय गंवाए दो विशेष टीमों का गठन किया। अंधेरे का फायदा उठाते हुए पुलिस ने पिपलदिलया के जंगलों को चारों ओर से घेर लिया। पुलिस को देखते ही शातिर रमेश ने कपास के घने खेतों में छिपकर भागने की कोशिश की। लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के आगे उसकी एक न चली। कड़ी मशक्कत के बाद उसे दबोच लिया गया।
गिरफ्तारी के शुरुआती घंटों में आरोपित ने पुलिस को गुमराह करने की हर मुमकिन कोशिश की। वह अपना नाम बताने में आनाकानी करता रहा और खुद को बेगुनाह बताता रहा। लेकिन जब टांडा पुलिस ने सख्ती बरती, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। जांच में खुलासा हुआ की आरोपित रमेश पुत्र नरसिंह चौहान के खिलाफ टांडा थाने में पहले से ही दो स्थायी वारंट थे और वह तिरला (धार) के मामलों में भी लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस रिकॉर्ड ने जो आंकड़े पेश किए, उसने जांच अधिकारियों के भी होश उड़ा दिए। रमेश कोई मामूली अपराधी नहीं, बल्कि अंतरराज्यीय गिरोह का मास्टरमाइंड है।
फिलहाल, टांडा पुलिस ने इस बड़ी कामयाबी की सूचना उन सभी आठ राज्यों को भेज दी है, जहाँ रमेश की तलाश वर्षों से की जा रही थी। इस गिरफ्तारी से चोरी और लूट की दर्जनों अनसुलझी गुत्थियां सुलझने की उम्मीद है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से सफेदपोश चेहरे शामिल हैं।







