फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी से शुरू हुए सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल को फंडिंग हवाला नेटवर्क के जरिये पहुंच रही थी। ये फंडिंग हवाला नेटवर्क के जरिये ही यूनिवर्सिटी से पकड़े गए और अभी भागे हुए डॉक्टरों तक पहुंचाई जा रही थी। खुफिया विभाग के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि डॉक्टरों के बैंक खातों की ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। उनके खातों में बीते कुछ महीनों के दौरान हुई ट्रांजेक्शन को चेक किया जा रहा है।
एक अधिकारी ने बताया कि हवाला का बड़ा नेटवर्क दिल्ली में सक्रिय है। इस मामले में जांच एजेंसी को इनपुट मिला है कि डॉ. मुज्जमिल, डॉ. उमर और डॉ. शाहीन दिल्ली के नेटवर्क के संपर्क में सीधे तौर पर नहीं थे।

2 of 13
शाहीन
– फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
डॉ. शाहीन से हुआ था सबसे पहले एजेंट का संपर्क
ये सभी लोग मेवात के एक एजेंट के जरिये दिल्ली के हवाला नेटवर्क के संपर्क में आए थे। एजेंट ही इनको टेरर फंडिंग के लिए हवाला से आ रहे रुपये लाकर मुहैया कराता था। इनमें सबसे पहले एजेंट का संपर्क डॉ. शाहीन से हुआ था। बाद में डॉ. मुज्जमिल और कुछ दिन पहले ही डॉ. उमर से एजेंट का संपर्क हुआ।

3 of 13
डॉ. मुजम्मिल की फाइल फोटो
– फोटो : अमर उजाला
लॉजिस्टिक से लेकर हर तरह के खर्च में काम आती है टेरर फंडिंग की ये रकम
आधिकारिक सूत्र ने बताया टेरर फंडिंग की ये रकम आतंकी मॉड्यूल से जुड़े आरोपी लॉजिस्टिक से लेकर हर तरह के खर्च में प्रयोग करते हैं। अधिकारी ने उदाहरण देकर बताया कि दिल्ली धमाके से पहले अमोनियम नाइट्रेट खरीदने के लिए, बम धमाके में इस्तेमाल कार के लिए, धमाके के लिए अन्य सामान खरीदने के लिए रुपयों की जरूरत रहती है। बार-बार रेकी करने जाने के लिए, कुछ अन्य सामान खरीदने में होने वाले खर्च सभी इन्हीं रुपयों से किए जाते हैं।

4 of 13
डॉ. मुजम्मिल अहमद की मां अपने बेटे का तस्वीर दिखाते हुए।
– फोटो : बसित जरगर
डायरी में मिले 30 से अधिक नाम व नंबर की भी हो रही जांच
जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने बताया कि डॉ. मुज्जमिल के कमरे से उन्हें एक डायरी के अलावा लैपटॉप समेत अन्य सामान मिला। उस पर जांच चल रही है। उस डायरी में 30 से अधिक लोगों के नाम व मोबाइल नंबर लिखे हुए हैं। इसके साथ ही कई नाम के आगे कुछ रकम भी लिखी हुई है।

5 of 13
अल फलाह यूनिवर्सिटी
– फोटो : अमर उजाला
इस लिस्ट के आधार पर मोबाइल नंबरों के जरिये जांच कर पता लगाया जा रहा है कि ये कौन लोग हैं और देश के किस हिस्से में एक्टिव है। ये भी शक है कि जिन कुछ नामों के आगे रकम लिखी हुई है, उन्हें आतंकियों की टेरर फंडिंग की रकम पहुंचाई गई है।







