सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों की अवहेलना को गंभीर अपराध मानते हुए हाई कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी करार दिया है। अब इस मामले में सजा के बिंदु पर शुक्रवार सुबह 10:30 बजे सुनवाई होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि नगर निगम द्वारा की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। न्यायालय ने माना कि याचिकाकर्ता को न तो व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया, न ही किसी प्रकार की सुनवाई की कार्यवाही दर्ज की गई और न ही कोई अंतिम आदेश पारित किया गया। इसके बावजूद सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई कर दी गई, जो कानून के खिलाफ है।
मामला मार्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि 18 नवंबर 2025 को नगर निगम ने उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को बिना विधि प्रक्रिया अपनाए ध्वस्त कर दिया। वहीं नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था और सात नवंबर 2024 को दी गई अनुमति पहले ही निरस्त की जा चुकी थी। निगम का यह भी कहना था कि 14 मई 2025 को नोटिस जारी कर नियमानुसार कार्रवाई की गई।
हालांकि हाई कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा वर्ष 2025 में जारी गाइडलाइन का पालन अनिवार्य था, जो इस मामले में नहीं किया गया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि बिना शर्त माफी मांगते हुए तोड़े गए हिस्से को बहाल किया जाता, तो मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार संभव था। लेकिन आयुक्त द्वारा बहाली को असंभव बताए जाने के बाद कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
न्यायालय ने नगर निगम आयुक्त को अवमानना अधिनियम 1971 की धारा 2(बी) के तहत दोषी ठहराते हुए स्पष्ट कर दिया कि न्यायिक आदेशों की अवहेलना किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। अब शुक्रवार को होने वाली सुनवाई में यह तय होगा कि इस अवमानना की कीमत कितनी भारी पड़ेगी।







