प्रदेश के करीब ढाई लाख संविदाकर्मियों के लिए शुक्रवार का दिन उम्मीद और राहत लेकर आया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक ऐसा ऐलान किया, जिसने वर्षों से नियमितीकरण का इंतजार कर रहे कर्मचारियों की तस्वीर बदल दी। सरकार की संविदा नीति-2023 के तहत अब 10 साल से अधिक सेवा दे चुके संविदाकर्मियों को नियमित पदों पर समाहित किया जाएगा।
यह संविलियन प्रक्रिया रिक्त पदों के 50 प्रतिशत तक लागू होगी, और मुख्यमंत्री ने साफ संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इसका दायरा और बढ़ाया जाएगा। यानी यह फैसला सिर्फ शुरुआत है, आगे और भी बड़े बदलाव संभव हैं।
दशहरा मैदान से बदली हजारों की किस्मत
डीए और सेवा सुरक्षा पर भी लगी मुहर
टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में आयोजित मप्र संविदा कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मंच के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। मंच से दिए गए इस भरोसे ने हजारों संविदाकर्मियों को स्थायी भविष्य की उम्मीद दे दी है।
सिर्फ नियमितीकरण ही नहीं, सरकार ने संविदाकर्मियों को कर्मचारियों के समान महंगाई भत्ता देने पर भी सहमति जताई है। इसके साथ ही सेवा समाप्ति जैसे मामलों में अब सीसीए नियम लागू होंगे, जिससे कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा मिलेगी।
यह फैसला न सिर्फ रोजगार की स्थिरता देगा, बल्कि संविदाकर्मियों के सम्मान और अधिकारों को भी नई पहचान दिलाएगा।







