अकाउंटेंट से लेकर भृत्य तक नपे, लेकिन प्रभारी बीओ पर कार्रवाई न होने से उठे सवाल
स्कूल शिक्षा विभाग के बीओ कार्यालय में सामने आए 2 करोड़ 87 लाख रुपये के गबन मामले ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। गंभीर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कलेक्टर शिवम वर्मा ने सख्त रुख अपनाते हुए कार्यालय के पांच कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
निलंबित किए गए कर्मचारियों में अकाउंटेंट दिनेश पवार, कर्मचारी मेघना चार्ल्स, भृत्य सिद्धार्थ जोशी, राहुल अहिरे और अतुल त्रिवेदी शामिल हैं। प्रारंभिक जांच में इन सभी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शासकीय धन के दुरुपयोग को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे।
हालांकि, इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि इतनी बड़ी राशि के गबन के बावजूद किसी भी प्रभारी बीओ पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। विभागीय निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर आमजन और कर्मचारियों के बीच असंतोष देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, इस निलंबन कार्रवाई को शिक्षा विभाग में वित्तीय अनुशासन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन प्रभारी अधिकारियों पर कार्रवाई न होने से मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।







