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दिनदहाड़े गोलीकांड से दहला वकालत जगत, 16 फरवरी को मध्यप्रदेश में न्यायालयीन कार्य ठप

शिवपुरी के अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना की 14 फरवरी 2026 को अपराधियों द्वारा गोली मारकर की गई निर्मम हत्या की तीव्र निंदा की है। इस घटना ने प्रदेश के विधि समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। परिषद का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था की रीढ़ पर सीधा प्रहार है।

परिषद द्वारा जारी अधिसूचना क्रमांक 2/2026 के अनुसार, 15 फरवरी को आयोजित विशेष सामान्य सभा की बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव क्रमांक 3/वि.जी.बी/2026 पारित किया गया। बैठक में कहा गया कि लगातार अधिवक्ताओं पर हो रहे हमले अत्यंत चिंताजनक हैं। डबरा के अधिवक्ता चंद्रभान सिंह मीना सहित विभिन्न जिलों में अधिवक्ताओं पर हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब दिनदहाड़े हत्या जैसी वारदातें इस बात का संकेत हैं कि अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं और अधिवक्ता स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

परिषद ने लंबे समय से राज्य शासन से एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग की है, किंतु अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होने पर रोष व्यक्त किया गया। परिषद का स्पष्ट मत है कि यदि अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की गई, तो न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास प्रभावित होगा।

इसी परिप्रेक्ष्य में 16 फरवरी 2026 को प्रदेशभर के अधिवक्ताओं द्वारा न्यायालयीन कार्य से विरत रहकर “प्रतिवाद दिवस” मनाने का निर्णय लिया गया है। परिषद ने सभी जिला एवं तहसील अधिवक्ता संघों से अपील की है कि वे पूर्णतः शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराएं। साथ ही देश के माननीय प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री को एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट तत्काल लागू किए जाने की मांग को लेकर पत्र भेजें। जिला स्तर पर कलेक्टर और तहसील स्तर पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

परिषद के कार्यकारी सचिव नीलेश जैन ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सम्मान की रक्षा के लिए है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार अधिवक्ता समुदाय की भावनाओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस कदम उठाएगी।

प्रदेश का विधि समुदाय अब एकजुट होकर यह संदेश देना चाहता है कि न्याय के रक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस जिम्मेदारी से अब और समझौता नहीं किया जाएगा।

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