छतरपुर जिले के गढ़ा गांव स्थित बागेश्वर धाम में 15 फरवरी को होने जा रहे 302 कन्याओं के सामूहिक विवाह महोत्सव से पहले शुक्रवार शाम माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया, जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हल्दी की रस्म निभाने यहां पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को हल्दी लगाकर विवाह महोत्सव की पारंपरिक शुरुआत की। इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री ने भी मुख्यमंत्री सहित मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और संतों को हल्दी लगाकर स्वागत किया। पूरा परिसर वैदिक मंत्रोच्चार, ढोल-नगाड़ों और जयकारों से गूंज उठा।
यह विवाह महोत्सव केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का संगम बनता दिख रहा है। आयोजन में आर्थिक रूप से कमजोर 302 कन्याओं का सामूहिक विवाह कराया जाएगा। जानकारी के अनुसार, 15 फरवरी को इस भव्य समारोह में छह राज्यों के मुख्यमंत्री और आठ देशों के राजदूत भी शामिल होंगे, जिससे कार्यक्रम का दायरा राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक विस्तृत हो गया है।
गुरुकुलम का शुभारंभ, वैदिक शिक्षा के नए युग की शुरुआत
विवाह महोत्सव की तैयारियों के बीच एक और महत्वपूर्ण क्षण तब आया, जब बागेश्वर धाम परिसर में “बागेश्वर धाम सनातन वैदिक गुरुकुल” का विधिवत शुभारंभ किया गया। फीता काटकर गुरुकुलम का उद्घाटन संत-महात्माओं और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कथावाचक रमेश भाई ओझा, सीहोर के प्रसिद्ध कथावाचक प्रदीप मिश्रा, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार तथा बद्रीनाथ वाले महाराज सहित अनेक संत उपस्थित रहे।
गुरुकुलम में शास्त्र और शस्त्र दोनों प्रकार की शिक्षा दी जाएगी। देशभर से चयनित बटुक ब्राह्मणों को सनातन वैदिक परंपरा के अनुरूप शिक्षित किया जाएगा। बनारस से आए चार विद्वान आचार्य यहां निवास करेंगे और प्रथम वर्ष में 31 विद्यार्थियों को वैदिक कर्मकांड एवं शास्त्रीय अध्ययन का प्रशिक्षण देंगे।
एक ओर 302 कन्याओं के विवाह का पावन आयोजन, दूसरी ओर वैदिक गुरुकुल की स्थापना—बागेश्वर धाम में यह अवसर सामाजिक समरसता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का संगम बनता नजर आ रहा है। अब सबकी निगाहें 15 फरवरी पर टिकी हैं, जब यह महोत्सव ऐतिहासिक रूप ले सकता है।







