मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों के तबादलों को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। सरकार ने 13 अक्टूबर की देर रात 23 IAS अधिकारियों की तबादला सूची जारी की। लेकिन इस सूची में तीन ऐसे अधिकारियों की नई पोस्टिंग ने सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें पहले गंभीर घटनाओं, लापरवाही या भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों के बाद पदों से हटाया गया था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच पूरी हो चुकी है? और क्या विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन तबादलों में कफ सिरप कांड से जुड़े एक अधिकारी को फिर से संभागीय स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त रहे रोहित सिसोनिया को रायसेन जिले का कलेक्टर नियुक्त किया गया है।
इन नियुक्तियों के बाद प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी तबादला नीति को लेकर बहस शुरू हो गई है। सवाल यह भी उठ रहा है कि गंभीर मामलों में नाम सामने आने या शिकायतें मिलने के बाद अधिकारियों की नई जिम्मेदारी तय करने के लिए सरकार किन मानकों का पालन करती है।
हालांकि, किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत या आरोप होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। इसलिए यह जानना भी जरूरी है कि संबंधित मामलों में जांच कहां तक पहुंची है और क्या कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आया है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में इन तीनों अधिकारियों के पुराने मामलों और जांच की मौजूदा स्थिति की पड़ताल की गई है।
अब देखना होगा कि इन नियुक्तियों को लेकर सरकार की ओर से कोई स्पष्टीकरण दिया जाता है या नहीं। फिलहाल, इन तबादलों ने मध्यप्रदेश में प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और अधिकारियों की पोस्टिंग को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।



