देश की राजनीति में एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने देश की आत्मा पर हमला किया है। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि यह लड़ाई किसी सरकार या पार्टी के खिलाफ निजी लड़ाई नहीं, बल्कि संविधान और लोकतंत्र को बचाने की मुहिम है।
राहुल गांधी ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है, रास्तों पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं और ट्रेनों व बसों को रोका जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर सरकार की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि जब तक वह पद से नहीं हटते, तब तक विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहेगा। इस बयान के बाद राजनीतिक टकराव और तेज होने के आसार हैं।
इसी बीच, कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक की विपक्षी पार्टियों ने आज सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने का ऐलान किया है। इस मार्च को ‘चलो दिल्ली मार्च फॉर डेमोक्रेसी’ नाम दिया गया है। विपक्षी नेताओं के दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर कनॉट प्लेस और बाराखंभा रोड जंक्शन पर जुटने की जानकारी दी गई है।
विपक्ष का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट तक इस तरह का मार्च पहली बार निकाला जा रहा है। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े अपने सवालों को सामने रखना चाहता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या विपक्ष का यह मार्च सरकार पर दबाव बनाने में सफल होगा? क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी संघर्ष और तेज होगा? फिलहाल, सबकी नजरें विपक्ष के मार्च और इस पूरे घटनाक्रम पर सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।




