सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को अहम सुनवाई हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR से जुड़े करीब 14 फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त को निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया, लेकिन चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने साफ संकेत दिया कि अगर यह पाया गया कि फैसले आवश्यक सहमति के बिना लिए गए थे, तो उन फैसलों को वापस लेने का आदेश दिया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा Form-6 को लेकर हुई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि Form-6 में किसी भी संशोधन को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी नहीं दी है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद चुनाव आयोग की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया।
चुनाव आयोग ने कहा कि 24 जून 2025 के बिहार SIR आदेश के दौरान Form-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा यानी Declaration जोड़ी गई थी। आयोग का दावा है कि सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई के अपने आदेश में इस व्यवस्था को सही ठहराया था।
खास बात यह है कि करीब 9 दिन पहले भी चुनाव आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर कहा था कि SIR के दौरान Form-6 के साथ लगाए गए Declaration को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली है।
अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और चुनाव आयोग के दावे के बीच पैदा हुआ यह अंतर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
अदालत का अगला रुख इसलिए महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि मामला केवल Form-6 में बदलाव तक सीमित नहीं है। इसके साथ यह सवाल भी जुड़ा है कि चुनाव आयोग के फैसले लेने की संवैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा है और आगे की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि Form-6 में किए गए बदलाव को अदालत की वास्तविक मंजूरी मिली थी या नहीं।




