जबलपुर में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने Gen-Z आंदोलन और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि युवाओं के आंदोलन को दबाने या कुचलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। उनके मुताबिक, युवाओं की आवाज और उनकी मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
शंकराचार्य ने कहा कि जो लोग खुद को राजनीति का चाणक्य या बहुत बड़ा रणनीतिकार समझते हैं, उन्हें शुद्ध हृदय वाले इन युवाओं से टकराने से बचना चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि मासूम और शुद्ध भावना से उठी आवाज के सामने राजनीतिक चतुराई हमेशा काम नहीं आती।
उन्होंने Gen-Z के आंदोलन को लेकर कहा कि जिन कामों को बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गज नहीं कर पाए, वह काम इस नई पीढ़ी ने करके दिखाया है। शंकराचार्य के बयान के मुताबिक, सरकार पहले यह दावा करती थी कि उसके दौर में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन Gen-Z के आंदोलन के बाद राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और इस्तीफा हुआ।
शंकराचार्य ने यह भी कहा कि अगर इस आंदोलन को लंबे समय तक चलने दिया गया तो इससे देश में नई राजनीतिक पीढ़ी तैयार हो सकती है। उन्होंने छात्र राजनीति और पुराने आंदोलनों का संदर्भ देते हुए कहा कि आंदोलनों से युवाओं को नेतृत्व का अनुभव मिलता है और आगे चलकर कई नए नेता सामने आ सकते हैं।
इसी दौरान उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने की मांग की। उनका कहना था कि चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अलग-अलग राजनीतिक संगठनों की ओर से भी मांगें उठी हैं, जबकि इन मुद्दों पर चुनाव आयोग की ओर से अपना पक्ष रखा गया है। ऐसे में शंकराचार्य का यह बयान Gen-Z आंदोलन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर जारी सार्वजनिक बहस में एक और महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।




