दिल्ली में शुक्रवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग अंदाज देखने को मिला। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के मौके पर दीनदयाल उपाध्याय पार्क में आयोजित भजन क्लबिंग कार्यक्रम में पीएम मोदी Gen-Z युवाओं के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने भजनों का आनंद लिया, तालियां बजाईं और खुद खंजरी बजाते हुए भी नजर आए। कार्यक्रम में युवा पारंपरिक भजनों को आधुनिक क्लबिंग अंदाज में प्रस्तुत कर रहे थे। यह आयोजन भक्ति संगीत और आधुनिक युवा संस्कृति के मेल के रूप में सामने आया।
भजन क्लबिंग का यह फॉर्मेट खास तौर पर युवाओं के बीच लोकप्रिय हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी पहले भी इस ट्रेंड का उल्लेख कर चुके हैं और इसे भक्ति, संस्कृति, आध्यात्मिकता और आधुनिकता के मेल के तौर पर बताया था। दिल्ली के इस कार्यक्रम में भी युवाओं की मौजूदगी के बीच पीएम मोदी ने संगीत के साथ ताल मिलाई और कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
लेकिन इस कार्यक्रम का राजनीतिक संदर्भ भी चर्चा में है। ठीक इसी समय Gen-Z युवाओं के मतदाता अधिकार और वोटर लिस्ट में नए मतदाताओं के जुड़ने को लेकर विपक्ष की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं। 25 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों में 18 साल की उम्र पूरी करने वाले नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर विवाद और कांग्रेस के आरोपों का उल्लेख किया गया है। इन आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
दरअसल, आने वाले वर्षों में Gen-Z देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मतदाता समूह बनने जा रहा है। इसी वजह से राजनीतिक दलों और नेताओं का युवाओं के साथ संवाद लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में भी युवाओं से संवाद देखने को मिला।
ऐसे में दिल्ली का यह भजन क्लबिंग कार्यक्रम सिर्फ संगीत और भक्ति तक सीमित नहीं दिखता, बल्कि युवाओं के बीच बदलते सांस्कृतिक ट्रेंड को भी सामने लाता है। अब आने वाले समय में Gen-Z के मुद्दे, उनकी भागीदारी और मतदाता के रूप में उनकी भूमिका भारतीय राजनीति की चर्चाओं में कितनी महत्वपूर्ण रहती है, यह देखने वाली बात होगी।




