मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने अपनी सेवानिवृत्ति के मौके पर ऐसा संकल्प लिया है, जिसने न्यायिक सेवा से लेकर सामाजिक सरोकार तक एक नई मिसाल पेश की है।
गुरुवार को हाईकोर्ट में आयोजित फुल कोर्ट फेयरवेल कार्यक्रम में रिटायर हुए जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री राहत कोष में एक करोड़ एक लाख रुपये देने की घोषणा की। यह राशि उन्हें अपने जनरल प्रॉविडेंट फंड यानी GPF से प्राप्त होगी।
जस्टिस सिंह ने कहा कि GPF की राशि उनके बैंक खाते में आते ही वे इसे प्रधानमंत्री राहत कोष में ट्रांसफर कर देंगे। उन्होंने बताया कि इस निर्णय के पीछे उनकी पत्नी इंदिरा की इच्छा भी महत्वपूर्ण रही। उनकी पत्नी चाहती थीं कि रिटायरमेंट के बाद समाज के लिए कुछ ऐसा किया जाए, जिससे जरूरतमंद लोगों की मदद हो सके।
सिर्फ आर्थिक योगदान ही नहीं, जस्टिस सिंह और उनकी पत्नी ने देहदान का संकल्प भी लिया है। उनका कहना है कि जीवन के बाद भी उनका शरीर चिकित्सा और समाज के काम आ सके, यही उनकी इच्छा है।
जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की न्यायिक सेवा का रिकॉर्ड भी उल्लेखनीय रहा है। करीब तीन वर्षों के कार्यकाल में उन्होंने 8,788 मुकदमों पर फैसला सुनाया। अब सेवानिवृत्ति के बाद समाज के लिए आर्थिक योगदान और देहदान का उनका फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक न्यायाधीश के रूप में फैसलों के जरिए न्याय देने के बाद अब सामाजिक योगदान के इस संकल्प के साथ जस्टिस सिंह ने यह संदेश दिया है कि सेवा की भावना पद और जिम्मेदारी खत्म होने के बाद भी जारी रह सकती है।




