मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले से बच्चों की मौत और रहस्यमयी बीमारी की चिंताजनक खबर सामने आई है। बीते तीन महीनों में 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत होने की बात सामने आई है, जबकि स्थानीय लोगों का दावा है कि वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है।
बालाघाट से करीब 85 किलोमीटर दूर जंगलों के बीच बसे अड़ोरी गांव और आसपास के इलाकों में बीमारी का खौफ साफ दिखाई दे रहा है। गांव में कई परिवार अपने बच्चों की सेहत को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, कई बच्चे इलाज के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज तो हो जाते हैं, लेकिन घर लौटने के बाद दोबारा तेज बुखार की शिकायत सामने आ रही है।
जांच के दौरान कुछ बच्चों में मीजल्स और मलेरिया के पॉजिटिव केस भी सामने आने की जानकारी है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने बीमारी की सही वजह पता लगाने और संक्रमण को रोकने की बड़ी चुनौती है।
प्रभावित इलाकों में हर दिन बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने की बात कही जा रही है। स्थानीय स्तर पर रोजाना करीब 60 बच्चों के बीमार होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि और बीमारी से होने वाली मौतों के वास्तविक कारणों की स्पष्ट तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी बढ़ाई गई है। स्कूलों में गतिविधियां जारी हैं, आंगनबाड़ियों में बच्चों के लिए भोजन तैयार किया जा रहा है और कई परिवारों तक साफ पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है आखिर बच्चों को बार-बार तेज बुखार क्यों हो रहा है और मौतों की असली वजह क्या है?
अब जरूरत है तेज और सटीक मेडिकल जांच, प्रभावित परिवारों तक लगातार स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और मौतों के वास्तविक आंकड़ों को सामने लाने की, ताकि बैगा समुदाय के बच्चों को इस संकट से सुरक्षित बचाया जा सके।




