सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र के गांवों में जहरीली और नकली शराब ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। अब तक करीब 28 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है, जबकि प्रशासन ने 24 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की है। कई लोग अब भी अस्पतालों में उपचाररत हैं।
घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। अवैध शराब के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस और प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले में अब तक 14 आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।
प्रशासन ने कार्रवाई को तीन स्तरों पर आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। सबसे पहले प्रभावित इलाकों में घर-घर सर्वे किया जा रहा है, ताकि शराब सेवन से प्रभावित लोगों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही गांवों में चौपाल लगाकर लोगों को नशे के खतरों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
तीसरे स्तर पर अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ आरोपियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि गांवों में चल रहे अवैध शराब के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना है।
इधर, बंडा सिविल अस्पताल में शराब सेवन से प्रभावित मरीजों की संख्या अब कम होने लगी है, जिससे प्रशासन को कुछ राहत मिली है। लेकिन इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मौतों के वास्तविक आंकड़े सामने नहीं लाए जा रहे हैं। वहीं, प्रशासन की ओर से आधिकारिक आंकड़े 24 मौतों के बताए जा रहे हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जहरीली शराब आखिर गांवों तक कैसे पहुंची और इस अवैध कारोबार के पीछे कौन लोग हैं। पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई के आगे बढ़ने के साथ अब इन सवालों के जवाब सामने आने की उम्मीद है।




