उत्तर प्रदेश का सबसे महंगा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे उद्घाटन के महज 18 दिन बाद ही सवालों के घेरे में आ गया है। जिस एक्सप्रेसवे को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने अमेरिका जैसे हाईवे का उदाहरण बताते हुए देश के लिए बड़ी उपलब्धि कहा था, वहीं अब उसकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
करीब 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर 84 स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई हैं। लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक लिमिटेड के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। कंपनी को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया गया है, उसके तीन वरिष्ठ अधिकारियों को परियोजना से हटाया गया है और अगले दो वर्षों के लिए प्रतिबंधित भी कर दिया गया है।
बताया जा रहा है कि इस परियोजना का ठेका उस कंपनी को मिला था, जिसका संबंध एक भाजपा सांसद के भाई से जुड़ा बताया जा रहा है। इस कारण मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। विपक्ष सरकार पर निर्माण गुणवत्ता और ठेका प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एक्सप्रेसवे की तकनीकी जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम करेगी। यह टीम सड़क की गुणवत्ता, निर्माण सामग्री और धंसने के वास्तविक कारणों का विस्तृत अध्ययन करेगी। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस एक्सप्रेसवे को आधुनिक भारत की पहचान बताया गया, वह उद्घाटन के कुछ ही दिनों में क्यों धंस गया? क्या निर्माण में लापरवाही हुई, क्या गुणवत्ता से समझौता किया गया, या फिर निगरानी व्यवस्था कमजोर रही? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट से सामने आने की उम्मीद है।







