दो वक्त की रोटी, सम्मान और बेहतर भविष्य का सपना लेकर मध्यप्रदेश के रायसेन जिले का रहने वाला मोहम्मद फैजान ओमान पहुंचा था। उसे बताया गया था कि मस्जिद में इमामत का काम मिलेगा, लेकिन हकीकत इतनी दर्दनाक निकली कि हर दिन उसे अपनी जिंदगी खत्म होती हुई महसूस होने लगी।
फैजान का आरोप है कि एजेंट ने उससे करीब 2 लाख रुपये लेकर ओमान भेजा। वहां पहुंचते ही उसका पासपोर्ट छीन लिया गया और मस्जिद में इमाम बनाने की बजाय उसे 40 कमरों वाले एक मिनिस्ट्री ऑफिस की सफाई में लगा दिया गया। रोजाना टॉयलेट साफ कराए गए, बर्तन धुलवाए गए और 14 से 15 घंटे तक लगातार काम कराया गया। इसके बावजूद न तय वेतन मिला और न ही भरपेट खाना।
फैजान का कहना है कि कई-कई दिन भूखा रहना पड़ता था। मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना इतनी बढ़ गई कि उसे लगने लगा था कि अब वह जिंदा वापस नहीं लौट पाएगा। मजबूरी और बेबसी के बीच कई बार उसके मन में आत्महत्या तक का विचार आया।
करीब ढाई महीने तक इस यातना को झेलने के बाद उसने किसी तरह मदद की गुहार लगाई। भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता सैयद आबिद हुसैन ने मामले को गंभीरता से उठाया और भारतीय दूतावास तथा विदेश मंत्रालय से संपर्क किया। लगातार प्रयासों के बाद फैजान को सुरक्षित भारत वापस लाया गया।
यह मामला विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर होने वाली कथित धोखाधड़ी और मानव शोषण पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने से पहले एजेंट की पूरी जांच-पड़ताल करें, सरकारी अनुमति और आधिकारिक दस्तावेजों की पुष्टि करें, ताकि बेहतर भविष्य का सपना किसी दर्दनाक कैद में न बदल जाए। फिलहाल फैजान अपने घर लौट चुका है, लेकिन उसकी आपबीती उन लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो बिना पूरी जांच के विदेश जाने का फैसला करते हैं।







