देशभर के लोगों के लिए महंगाई को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। जून महीने में थोक महंगाई यानी WPI बढ़कर 9.87 फीसदी पर पहुंच गई है, जो पिछले 44 महीनों का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इससे पहले सितंबर 2022 में थोक महंगाई 10.70 फीसदी दर्ज की गई थी। लगातार बढ़ती महंगाई अब आम आदमी की जेब पर सीधा असर डाल रही है।
कॉमर्स मिनिस्ट्री द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले सामानों की कीमतों में देखने को मिला है। यानी अब रसोई का बजट संभालना पहले से ज्यादा मुश्किल होता जा रहा है। दाल, सब्जियां, अनाज और जरूरी घरेलू सामान की बढ़ती कीमतों ने परिवारों की चिंता बढ़ा दी है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो रोजाना जरूरत वाले सामान यानी प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई 4.99 फीसदी से बढ़कर 7 फीसदी हो गई है। वहीं फूड इंडेक्स भी 4.49 फीसदी से बढ़कर 6.14 फीसदी पर पहुंच गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि फ्यूल और पावर की थोक महंगाई 30.33 फीसदी से घटकर 27.41 फीसदी दर्ज की गई है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई दर में कोई बदलाव नहीं हुआ और यह 7.48 फीसदी पर स्थिर रही।
इससे पहले जारी खुदरा महंगाई यानी रिटेल इंफ्लेशन के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले रहे। जून में रिटेल महंगाई लगातार छठे महीने बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। यानी थोक और खुदरा, दोनों स्तरों पर महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में तेजी जारी रही, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का असर बढ़ा, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकती है। ऐसे में आम लोगों को अपनी जेब पर और ज्यादा बोझ उठाना पड़ सकता है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले महीनों में महंगाई पर लगाम लगेगी, या फिर रोजमर्रा की जिंदगी और महंगी होती जाएगी। इस खबर पर आपकी क्या राय है? हमें कमेंट करके जरूर बताइए।







