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तीन देशों से बड़ी रणनीतिक जीत, पीएम मोदी की वापसी ने बदला हिंद-प्रशांत का समीकरण, सबांग पोर्ट से यूरेनियम तक, भारत के बढ़ते कदमों से चीन-अमेरिका की बढ़ी बेचैनी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छह दिनों का तीन देशों का दौरा सिर्फ कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत का बड़ा संकेत माना जा रहा है। इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा के दौरान कई अहम समझौते हुए, जिनका असर आने वाले वर्षों में भारत की रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा पर दिखाई दे सकता है। आइए जानते हैं कि इस दौरे से भारत को क्या बड़ी उपलब्धियां मिलीं।

प्रधानमंत्री मोदी ने सबसे पहले इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात की। दोनों देशों के बीच 14 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा सबांग पोर्ट परियोजना की रही।

सबांग पोर्ट मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद करीब स्थित है, जहां से दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है। भारत और इंडोनेशिया के इस समझौते से हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत होगी। खास बात यह है कि ग्रेट निकोबार पोर्ट और सबांग पोर्ट मिलकर भारत को मलक्का स्ट्रेट के दोनों ओर प्रभाव बढ़ाने का अवसर देंगे, जिसे चीन की समुद्री रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया पहुंचे, जहां दोनों देशों ने रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और परमाणु सहयोग को नई गति देने पर सहमति जताई। ऑस्ट्रेलिया से यूरेनियम और क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति भारत की ऊर्जा सुरक्षा और परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजनाओं को भी मजबूती मिलेगी।

दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड पहुंचे, जहां व्यापार, शिक्षा, कृषि, तकनीक और निवेश को लेकर कई नए सहयोगी प्रस्तावों पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त समुद्री मार्ग और आपसी आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने का संकल्प भी दोहराया।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत की विदेश नीति के लिए एक अहम पड़ाव माना जा रहा है। एक तरफ समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती मिली है, तो दूसरी ओर ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी के नए रास्ते खुले हैं। ऐसे में इस दौरे को भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

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