“हैलो… मैं दिव्या बोल रही हूं।” बस इसी एक मैसेज से शुरू हुई बातचीत ने ग्वालियर के एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट को 21 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी का शिकार बना दिया। मध्यप्रदेश चेंबर ऑफ कॉमर्स के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और वरिष्ठ सीए अशोक विजयवर्गीय से सोशल मीडिया पर दोस्ती की गई, भरोसा जीता गया और फिर उन्हें निवेश के नाम पर ऐसा फंसाया गया कि देखते ही देखते करोड़ों रुपये साइबर अपराधियों के खातों में पहुंच गए।
जानकारी के मुताबिक पूरा खेल 25 दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच चला। खुद को दिव्या बताने वाली महिला ने सोशल मीडिया पर संपर्क किया। धीरे-धीरे चैटिंग बढ़ी और फिर एक ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म से जोड़ दिया गया। शुरुआत में छोटे निवेश पर अच्छा मुनाफा दिखाकर भरोसा बनाया गया, जिससे पीड़ित को लगा कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है।
इसके बाद ठगों ने बड़ी रकम निवेश कराने का सिलसिला शुरू किया। पोर्टल पर करोड़ों रुपये का मुनाफा और बढ़ती हुई रकम दिखाई जाती रही। लेकिन जब पैसे निकालने की कोशिश की गई तो इनकम टैक्स, रिस्क मार्जिन, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर लगातार नई-नई रकम जमा कराने का दबाव बनाया गया। हर भुगतान के बाद नया बहाना सामने आता रहा और निकासी कभी नहीं हुई।
जब करोड़ों रुपये जमा कराने के बावजूद रकम वापस नहीं मिली, तब अशोक विजयवर्गीय को एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। इसके बाद उन्होंने 11 जुलाई को पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि ठगों ने बेहद पेशेवर तरीके से फर्जी निवेश पोर्टल और सोशल मीडिया के जरिए पूरा जाल बिछाया था।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की दोस्ती और ऑनलाइन निवेश के बड़े-बड़े मुनाफे के दावे बेहद खतरनाक हो सकते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें और लालच में आकर किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर पैसे ट्रांसफर न करें।







