करीब चार महीने पहले हुए भीषण हवाई हमले में मारे गए ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अब राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। 4 जुलाई से शुरू हुआ यह ऐतिहासिक अंतिम यात्रा कार्यक्रम 9 जुलाई तक चलेगा और इसे ईरान के इतिहास के सबसे बड़े शोक समारोहों में गिना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस्लामिक परंपराओं के बावजूद अंतिम संस्कार में चार महीने की देरी क्यों हुई? आमतौर पर इस्लाम में निधन के 24 घंटे के भीतर दफन की परंपरा है, लेकिन उस समय ईरान और इजराइल के बीच युद्ध जैसी स्थिति, लगातार सुरक्षा खतरे और संभावित हमलों की आशंका के कारण सरकार ने शव को सुरक्षित कोल्ड स्टोरेज में संरक्षित रखा। हालात कुछ सामान्य होने और युद्धविराम लागू होने के बाद ही इस राजकीय कार्यक्रम का फैसला लिया गया।
4 और 5 जुलाई को तेहरान में आम लोगों के अंतिम दर्शन होंगे, जहां लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद 6 और 7 जुलाई को अंतिम यात्रा ईरान के प्रमुख धार्मिक शहरों से होकर निकलेगी। 8 जुलाई को कार्यक्रम इराक के नजफ और करबला तक पहुंचेगा, जबकि 9 जुलाई को खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में पूरे राजकीय सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
इस पूरे समारोह के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई है। लाखों लोगों की भीड़, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी और पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट के बीच दुनिया की नजरें अब ईरान पर टिकी हैं। यह अंतिम यात्रा सिर्फ एक नेता की विदाई नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व की बदलती राजनीति और आने वाले दौर का भी बड़ा संकेत मानी जा रही है।
फिलहाल, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह भव्य विदाई क्षेत्र में शांति का संदेश बनेगी या फिर आने वाले समय में नए भू-राजनीतिक तनाव की शुरुआत करेगी? इस बड़ी खबर पर हमारी नजर लगातार बनी रहेगी।







