ईरान से एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके बेटे मुजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। बताया जा रहा है कि सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित इजराइली हमले की आशंका को देखते हुए उन्हें समारोह से दूर रहने की सलाह दी है।
हालांकि, इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है, लेकिन सुरक्षा कारणों से उठाया गया यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी तरह के खतरे को टालने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया 4 जुलाई से शुरू होगी, जबकि उन्हें 9 जुलाई को ईरान के पवित्र शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान दुनिया के कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
भारत की ओर से भी उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अंतिम संस्कार में शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है, यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक या पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब सबकी नजरें 4 जुलाई से शुरू होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रम और उससे जुड़े सुरक्षा इंतजामों पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस दौरान क्षेत्रीय तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है।







