लोकसभा के मानसून सत्र से पहले दिल्ली की राजनीति में एक नई हलचल दिखाई दे रही है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु को बीजेपी की अगली बड़ी राजनीतिक चुनौती माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी की नजर सिर्फ सरकार चलाने पर नहीं, बल्कि संसद में ऐसा संख्या बल जुटाने पर है जिससे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान हो सके।
बताया जा रहा है कि केंद्र की रणनीति दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने की है। इसके पीछे कई बड़े एजेंडे बताए जा रहे हैं। इनमें संसद की सीटों का परिसीमन कर संख्या को 850 तक बढ़ाने की संभावित योजना, महिला आरक्षण कानून का पूर्ण क्रियान्वयन और ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पिछले सत्र में कुछ अहम विधेयकों पर अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन ने नई रणनीति तैयार की है। इसी के तहत विपक्षी दलों के कुछ सांसदों के संपर्क में होने की भी चर्चाएं तेज हैं। पश्चिम बंगाल की टीएमसी और महाराष्ट्र की शिवसेना यूबीटी के कुछ सांसदों के पाला बदलने की अटकलें भी सामने आ रही हैं।
हालांकि, अभी दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। जानकारों का मानना है कि यदि एनडीए इस आंकड़े के करीब पहुंचता है, तो केंद्र सरकार विशेष संसद सत्र बुलाकर बड़े विधायी कदम उठा सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या तमिलनाडु बीजेपी के इस मिशन का अगला पड़ाव बनेगा? और क्या आने वाले महीनों में देश की राजनीति किसी बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है? जवाब आने वाले समय में संसद और सियासत दोनों में दिखाई देगा।







