दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिस स्टे होटल अग्निकांड अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि जांच और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है। 3 जून को लगी भीषण आग में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें एक ही परिवार के 8 सदस्य और कई विदेशी नागरिक शामिल हैं। 30 से ज्यादा लोग अब भी गंभीर चोटों से जूझ रहे हैं।
लेकिन हादसे के बाद जिस दिशा में जांच बढ़ रही है, उस पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि होटल मालिकों, नगर निगम और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर पर्दा डालने के लिए 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को आरोपी बनाकर पूरे मामले का बोझ उनके कंधों पर डाला जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि होटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई, फायर सिस्टम नाकाम रहा और प्रशासनिक लापरवाही थी, तो सिर्फ एक कर्मचारी ही जांच के घेरे में क्यों है? आखिर उन लोगों की जिम्मेदारी कौन तय करेगा जिन्होंने इस इमारत को संचालित और निगरानी में रखा था?
23 मौतों के बाद अब पीड़ित परिवार और नागरिक समाज निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर इस मामले में भी बड़े नाम बच गए, तो यह सिर्फ एक अग्निकांड नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था पर भी बड़ा धब्बा साबित होगा।







