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मासूम की चीखें, खामोश रही कॉलोनीभरोसे के साए में छिपा हैवान

मध्य प्रदेश की एक सुरक्षित मानी जाने वाली सेंट्रल जेल कॉलोनी… जहां कानून के रखवाले रहते थे, वहीं एक ऐसा खौफनाक अपराध हुआ जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। यह कहानी है एक 16 साल की मासूम बेटी की, जिसके सपने, उसकी मुस्कान और उसका भविष्य एक दरिंदे की हैवानियत की भेंट चढ़ गए।

21 फरवरी 1996 की वह सुबह आज भी लोगों के जेहन में सिहरन पैदा करती है। सेंट्रल जेल कॉलोनी के क्वार्टर नंबर-Y के पीछे अचानक लोगों की भीड़ जमा होने लगी। पुलिसकर्मियों की आवाजाही बढ़ गई और हर निगाह घर के पीछे बने सेप्टिक टैंक पर टिक गई। कुछ ही देर बाद जो सच सामने आया, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया।

बताया जाता है कि मासूम के साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसकी हत्या कर शव को सेप्टिक टैंक में छिपा दिया गया। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि वारदात के दौरान चीखें सुनाई देने की चर्चा हुई, लेकिन किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। अगर उसी समय किसी ने साहस दिखाया होता, तो शायद एक बेटी की जान बच सकती थी।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि भरोसे, सुरक्षा और संवेदनशीलता की भी हत्या थी। जिस कॉलोनी को सबसे सुरक्षित माना जाता था, वहीं एक परिवार की दुनिया उजड़ गई। यह मामला आज भी याद दिलाता है कि अपराधी का चेहरा हमेशा अनजान नहीं होता, कभी-कभी वह भरोसे की आड़ में हमारे बेहद करीब भी छिपा होता है।सवाल आज भी वही है अगर उस दिन चीखों को अनसुना न किया जाता, तो क्या एक मासूम की जिंदगी बच सकती थी?

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