सोचिए… आप जिंदा हों, सांस ले रहे हों, अपने हक के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हों… लेकिन सरकार के रिकॉर्ड में आपकी मौत हो चुकी हो! सुनने में अजीब लगता है, लेकिन मध्य प्रदेश के सतना और मऊगंज में यही कड़वा सच सामने आया है।
सतना के गणपत कुशवाहा बताते हैं कि अचानक उनका राशन बंद हो गया, वृद्धावस्था पेंशन रुक गई और समग्र आईडी से नाम गायब हो गया। जब उन्होंने जांच कराई तो पता चला कि सरकारी रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। इतना ही नहीं, कागजों में उनका अंतिम संस्कार तक हो चुका है।
दरअसल, मुख्यमंत्री जन कल्याण यानी संबल योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। आरोप है कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जिंदा लोगों को कागजों पर मृत दिखाकर उनके नाम पर मिलने वाली आर्थिक सहायता की राशि निकाल ली गई।
दैनिक भास्कर की पड़ताल में खुलासा हुआ कि कई ऐसे लोग, जिन्हें सरकारी रिकॉर्ड में मृत दिखाया गया, आज भी जिंदा हैं। वहीं जिनकी वास्तव में मौत हुई, उनके परिवारों को यह तक नहीं पता चला कि उनके नाम पर कब पैसा स्वीकृत हुआ और किसने निकाल लिया।
सिर्फ सतना और मऊगंज जिलों में ही इस फर्जीवाड़े के जरिए करीब 45 लाख रुपए हड़पने का मामला उजागर हुआ है। अब सवाल यह है कि आखिर गरीबों के हक का पैसा किसकी जेब में गया और इस पूरे खेल में कौन-कौन शामिल है? कागजों पर मौत, खातों में घोटाला और गरीबों के अधिकारों पर डाका… यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि व्यवस्था पर सबसे बड़ा सवाल है।







