मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था अब खुद सवालों के घेरे में है। ‘ऑपरेशन लोकायुक्त’ के पहले पार्ट में जो खुलासे हुए, उन्होंने पूरे सिस्टम को हिलाकर रख दिया। कैमरे में लोकायुक्त के टेक्नीशियन, आरक्षक और रीडर कथित तौर पर ट्रैप मामलों को कमजोर करने के बदले लाखों रुपए की डील करते दिखाई दिए।
स्टिंग में टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा ने दावा किया कि वह डीएसपी स्तर के अधिकारियों तक सीधी पहुंच रखता है। बातचीत के दौरान उसने दो डीएसपी अधिकारियों के नाम लेते हुए 3 से 5 लाख रुपए तक की रिश्वत की कथित डील की बात कही। इतना ही नहीं, उसने 19 मई को मुलाकात कराने का भरोसा भी दिया।
सबसे चौंकाने वाला दावा तब सामने आया, जब बातचीत में कथित तौर पर कहा गया कि “चोरी सब करते हैं, पकड़ा गया वही चोर।” इस कथन ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसी के भीतर ही मामलों को प्रभावित करने का नेटवर्क सक्रिय है?
अब जनता जवाब चाहती है। क्या यह कुछ कर्मचारियों की करतूत है या सिस्टम में कहीं गहरी सड़ांध मौजूद है? कैमरे में कैद ये बातचीत सिर्फ एक स्टिंग नहीं, बल्कि उस भरोसे पर सवाल है जिसके दम पर आम लोग न्याय की उम्मीद लेकर लोकायुक्त के दरवाजे तक पहुंचते हैं।
फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन खुलासों के बाद कार्रवाई होती है या फिर मामला फाइलों में दबकर रह जाता है।







