मुजफ्फरपुर की एक दर्दनाक रात ने कई परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। शहर के एक निजी अस्पताल के ICU में अचानक लगी आग ने देखते ही देखते भयावह रूप ले लिया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक शॉर्ट सर्किट के बाद ICU में लगे एसी में धमाका हुआ और आग तेजी से पूरे वार्ड में फैल गई। उस वक्त ICU में भर्ती मरीज जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, लेकिन अचानक उठीं लपटों ने हालात को और भयावह बना दिया।
रात करीब 3 बजे हुए इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। परिजनों का आरोप है कि संकट की घड़ी में अस्पताल का स्टाफ मौके से गायब हो गया, जिसके बाद मरीजों को बचाने की जिम्मेदारी खुद परिवार वालों को उठानी पड़ी। कई लोग अपने मरीजों को स्ट्रेचर पर लेकर अस्पताल से बाहर भागते दिखाई दिए।
ICU पांचवीं मंजिल पर होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। दमकलकर्मियों ने खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर अंदर फंसे मरीजों को बाहर निकाला। हादसे में गीता देवी, उदय कुमार और शशांक कुमार की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है।
सवाल यह है कि जिस अस्पताल में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहां अग्नि सुरक्षा के इंतजाम कितने मजबूत थे? क्या समय रहते सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय होती तो इन जिंदगियों को बचाया जा सकता था? फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है, लेकिन इस हादसे ने अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।







