पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा भूचाल आता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर ऐसी बगावत की खबर सामने आई है, जिसने ममता बनर्जी की सियासी ताकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी से निकाले गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को 58 बागी विधायकों ने विधायक दल का नेता घोषित कर दिया है।
बुधवार को बागी गुट ने विधानसभा अध्यक्ष को समर्थन पत्र सौंपते हुए अपना शक्ति प्रदर्शन किया। सूत्रों के मुताबिक, पत्र पर 58 विधायकों के हस्ताक्षर हैं। दिलचस्प बात यह है कि बागी विधायक अभी भी ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष मान रहे हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और उनके फैसलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि अगर 80 में से 58 विधायक अलग गुट में चले जाते हैं, तो ममता बनर्जी के साथ सिर्फ 22 विधायक ही बचेंगे। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या टीएमसी के भीतर सत्ता और नेतृत्व की जंग अब खुलकर सामने आ गई है?
हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि और राजनीतिक तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय है कि बंगाल की सियासत में उठी यह बगावत आने वाले दिनों में बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर सकती है। अब सबकी नजर ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।







