मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की उथली हीरा खदानों में सिर्फ मेहनत ही नहीं, बल्कि आस्था और अंधविश्वास का भी गहरा असर देखने को मिलता है। यहां हीरा तलाशने की प्रक्रिया कई बार तंत्र-मंत्र और टोने-टोटकों के साथ शुरू होती है। स्थानीय मजदूरों का मानना है कि बिना इन परंपराओं के किस्मत का दरवाजा नहीं खुलता। यही वजह है कि बुधवार और रविवार को विशेष रूप से कुछ अनोखी क्रियाएं की जाती हैं, जिन्हें असरदार माना जाता है। इन मान्यताओं में श्मशान की राख से लेकर अन्य विचित्र तरीकों का इस्तेमाल भी शामिल है।
छतरपुर से आए मजदूर पप्पू पिछले छह महीनों से अपने परिवार के साथ हीरापुर की खदानों में काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि खुदाई शुरू करने से पहले धरती माता और खेतपाल बाबा से अनुमति लेना जरूरी होता है। मजदूरों के बीच यह धारणा प्रचलित है कि खदानों पर बुरी नजर का साया रहता है, जिससे हीरा जमीन में धंस सकता है या मिट्टी में बदल सकता है। इस खतरे से बचने के लिए खदान के मुहाने पर काला कपड़ा, फटे जूते, जड़ी-बूटियां और जानवरों की हड्डियां बांधी जाती हैं। पप्पू के अनुसार, हीरा चंचल होता है और केवल साफ नीयत वाले व्यक्ति के पास ही टिकता है। अगर खुदाई के दौरान सांप दिखाई दे जाए या कोई बुरा सपना आए, तो काम तुरंत रोक दिया जाता है इसे किसी अनहोनी या खजाने के रक्षक का संकेत माना जाता है।







