मध्य प्रदेश में एक ओर राज्य सरकार लोगों को सोलर ऊर्जा अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी खर्च से सोलर उपकरणों की स्थापना पर रोक लगाने का बड़ा फैसला सामने आया है। ऊर्जा विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट कहा है कि अब पंचायतों और शहरी वार्डों में सोलर लाइट, सोलर ट्री, हाईमास्ट और सोलर स्टड जैसे उपकरण नहीं लगाए जाएंगे।
विभाग का तर्क है कि इन उपकरणों की नियमित सफाई और रखरखाव नहीं हो पाता, जिसके कारण ये जल्द ही खराब होकर बेकार हो जाते हैं। इससे न सिर्फ इनका उद्देश्य पूरा नहीं हो पाता बल्कि सरकारी धन की भी बर्बादी होती है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय समन्वय समिति की बैठक में इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया।
कलेक्टरों को दिए गए निर्देशों में साफ कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में यह सुनिश्चित करें कि इन सोलर उपकरणों की स्थापना पर सरकारी बजट खर्च न किया जाए। शासन का मानना है कि जब तक इनके रखरखाव की ठोस व्यवस्था नहीं बनती, तब तक इन पर निवेश करना व्यर्थ है।
सवाल यह उठता है कि जब सरकार सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहती है, तो फिर जमीनी स्तर पर ऐसे फैसले क्यों लिए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान रोक नहीं, बल्कि बेहतर प्रबंधन और मेंटेनेंस सिस्टम हो सकता है। फिलहाल यह निर्णय नीति और क्रियान्वयन के बीच तालमेल पर नई बहस को जन्म दे रहा है।







