छिंदवाड़ा जिले में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से लौटते समय हुए दर्दनाक सड़क हादसे को पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन दर्द और सदमे की लहर अब भी वैसी ही बनी हुई है। करेर और भंडारकुंड गांव आज भी शोक में डूबे हैं। हर गली, हर आंगन में सन्नाटा पसरा है, जिसे बीच-बीच में परिजनों की चीखें चीर देती हैं।
रविवार को हादसे में जान गंवाने वालों की तीसरे दिन की रस्में पूरी की गईं। अस्थि संचय के बाद जैसे ही परिवार के लोग घर लौटे, गांव का माहौल फिर से गमगीन हो उठा। रिश्तेदारों के पहुंचते ही घरों में विलाप तेज हो जाता है। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है, और हर कोई अपने खोए हुए अपनों को याद कर रहा है।
इस हादसे में जान गंवाने वाले 10 लोगों में से 5 करेर गांव के ही थे, जिनमें 3 महिलाएं और 2 पुरुष शामिल हैं। इस एक हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह से तोड़ दिया है। कहीं घर का कमाने वाला चला गया, तो कहीं बुजुर्ग और छोटे बच्चे बेसहारा हो गए हैं।
गांव में कई घर ऐसे हैं, जहां पिछले चार दिनों से चूल्हा तक नहीं जला। दुख की इस घड़ी में पड़ोसी ही परिवार बनकर सामने आए हैं। वे खाने-पीने से लेकर हर जरूरी मदद पहुंचा रहे हैं। करेर और भंडारकुंड में हर तरफ बस एक ही भावना है अविश्वास और गहरा दुख। लोगों की आंखों में आज भी एक ही सवाल है—क्या उनके अपने सच में कभी लौटकर नहीं आएंगे।







