मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश देने वाले महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के आदेश के बाद इंदौर लोकायुक्त की टीम ने एक और घूसखोर अधिकारी को बेनकाब कर दिया। इस बार जाल में फंसी है धार जिले की पटवारी भारती राजपूत, जो जनता के हक के बदले नोटों की भूख पाल बैठी थी।
मामला सरदारपुर तहसील के ग्राम कुमारिया खेड़ी का है। यहां रहने वाले 53 वर्षीय लक्ष्मण कुमावत ने अपने ही घर और पीछे की जमीन का पट्टा अपने नाम कराने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाए। लेकिन कानून और अधिकार की भाषा समझाने के बजाय पटवारी भारती राजपूत ने सीधे सौदेबाजी शुरू कर दी। आरोप है कि पट्टा जल्दी करवाने के नाम पर एक लाख रुपये की मोटी रिश्वत मांगी गई। लक्ष्मण कुमावत ने इस खुलेआम भ्रष्टाचार के सामने झुकने के बजाय आवाज उठाई और इंदौर लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त राजेश सहाय के नेतृत्व में शिकायत का सत्यापन किया गया, जिसमें पटवारी की रिश्वतखोरी की कहानी सच निकली।
इसके बाद 13 मार्च 2026 को लोकायुक्त टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही पटवारी भारती राजपूत ने रिश्वत की पहली किश्त 5 हजार रुपये लेने के लिए हाथ बढ़ाया, उसी पल लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों धर दबोचा। जो पटवारी जनता की जमीन और अधिकार की रखवाली करने के लिए नियुक्त थी, वही कुर्सी का इस्तेमाल नोटों की वसूली के लिए कर रही थी। लेकिन लालच की यह कहानी ज्यादा देर तक छिप नहीं सकी और पहली ही किश्त ने पूरी साजिश को उजागर कर दिया।
फिलहाल आरोपिया पटवारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 के तहत कार्रवाई जारी है। लोकायुक्त की इस कार्रवाई ने एक बार फिर साफ कर दिया कि सरकारी कुर्सी को दलाली का अड्डा बनाने वालों पर अब शिकंजा कसता जा रहा है।







