बुरहानपुर से एक बार फिर वही खबर आई है, जो हर अधूरे और लापरवाह निर्माण की पहचान बन चुकी है अव्यवस्था, लापरवाही और जनता की परेशानी शनिवार दोपहर इंदौर–इच्छापुर नेशनल हाईवे पर निंबोला के पास निर्माणाधीन पुल के पास एक क्रेन अचानक पलट गई। बस फिर क्या था… देखते ही देखते सड़क के दोनों ओर करीब दो किलोमीटर तक वाहनों की लंबी कतार लग गई। ट्रक, बसें, कारें और बाइक सब सड़क पर खड़े-खड़े धूप में झुलसते रहे।
सबसे बड़ी बात ये कि जहां हादसा हुआ, वहां आसपास पानी तक का इंतजाम नहीं था। तेज धूप में फंसे लोग प्यास से बेहाल होते रहे। बच्चे रोते रहे, बुजुर्ग परेशान होते रहे… लेकिन जिम्मेदारों का कहीं कोई अता-पता नहीं था।
बताया जा रहा है कि यहां पुल निर्माण का काम चल रहा है और वाहनों के लिए अस्थायी बायपास मार्ग बनाया गया है। क्रेन से पुल के लिए गर्डर चढ़ाई जा रही थी। लेकिन शायद वजन का अंदाजा लगाने की जिम्मेदारी भी किसी ने गंभीरता से नहीं ली। नतीजा क्रेन का संतुलन बिगड़ा और वो सड़क पर ही पलट गई।
क्रेन पलटते ही पूरा रास्ता बंद हो गया। करीब एक घंटे से ज्यादा समय तक लोग जाम में फंसे रहे। बाद में ठेकेदार के कर्मचारियों ने दूसरी क्रेन बुलाकर किसी तरह उसे हटाया, तब जाकर वाहनों की आवाजाही शुरू हो सकी। लेकिन सवाल सिर्फ इस एक हादसे का नहीं है। स्थानीय लोग साफ कह रहे हैं कि हाईवे का निर्माण कर रही एजेंसी पहले भी कई बार लापरवाही दिखा चुकी है। इसी लापरवाही की कीमत पहले भी लोगों की जान देकर चुकाई जा चुकी है।
शाहपुर इलाके में गिट्टी के भंडारण स्थल पर मिट्टी में दबकर एक श्रमिक के दो मासूम बच्चों की मौत हो चुकी है। कई बार हादसे हुए, कई बार चेतावनियां दी गईं… लेकिन ठेकेदार पर उसका कोई असर दिखाई नहीं देता। एनएचएआई के अधिकारी चेतावनी देने का दावा तो करते हैं, लेकिन सवाल ये है कि अगर चेतावनियों से कुछ बदलता नहीं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
हाईवे का ज्यादातर काम पूरा होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन जो थोड़ा-बहुत काम बाकी है, वही सबसे ज्यादा खतरनाक साबित हो रहा है। और सच कहें तो ऐसा लगता है कि यहां निर्माण नहीं, बल्कि लापरवाही की इमारत खड़ी की जा रही है… जिसकी कीमत हर बार आम जनता को ही चुकानी पड़ रही है।







