कटनी के बाबा घाट के पास आज जो हुआ, उसने एक बार फिर रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिलासपुर से कोयला लेकर बड़ोदरा जा रही मालगाड़ी अचानक पटरी से उतर गई और देखते ही देखते उसके पांच डिब्बे ट्रैक से नीचे जा गिरे। तेज धमाके की आवाज के साथ कोयला चारों तरफ ट्रैक पर बिखर गया और बिलासपुर–बीना रेलमार्ग पूरी तरह प्रभावित हो गया।
बताया जा रहा है कि यह हादसा कटनी मुड़वारा स्टेशन से पहले बाबा घाट के पास बने केबिन के नजदीक हुआ। सुबह करीब 11 बजे जैसे ही मालगाड़ी एनकेजे से आगे बढ़ी, अचानक एक के बाद एक पांच डिब्बे पटरी से उतर गए। हालात ऐसे बन गए कि चालक को तुरंत गाड़ी रोकनी पड़ी और अधिकारियों को सूचना देनी पड़ी।
हादसे की खबर मिलते ही रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया। एनकेजे, कटनी, जबलपुर और सतना से राहत टीमें मौके पर दौड़ पड़ीं। जबलपुर मंडल के डीआरएम कमल तलरेजा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे और पटरी से उतरे डिब्बों को काटकर अलग करने का काम शुरू कराया गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं। ट्रैक की निगरानी और सुरक्षा के तमाम दावे आखिर जमीन पर क्यों फेल हो जाते हैं। एक मालगाड़ी के पटरी से उतरते ही पूरा रेलमार्ग ठप हो जाता है और यात्री ट्रेनों से लेकर मालगाड़ियों तक को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ता है।
फिलहाल ट्रैक पर बिखरे कोयले को हटाने और डिब्बों को पटरी पर लाने का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। मजदूरों और मशीनों की मदद से डिब्बों में भरा कोयला खाली कराया जा रहा है ताकि जल्द से जल्द ट्रैक की मरम्मत कर रेल यातायात बहाल किया जा सके। लेकिन तब तक सवाल वही है क्या हर बार हादसे के बाद ही रेलवे जागेगा, या कभी पहले भी जिम्मेदारी निभाई जाएगी।







