इंदौर में एलिट अपेक्स के पास रेस कोर्स बिल्डिंग के पास में जो निर्माणाधीन हाईराइज बिल्डिंग बनने के दौरान पिछली बार जो दीवार और सड़क गिरी थी, आज महालक्ष्मी नगर MR-6 की तरफ वाली पीछे की दीवार भी गिर गई। नीचे उसी घटना पर आधारित एक आक्रोश से भरी, तीखी और सस्पेंस से भरपूर न्यूज़ स्क्रिप्ट दी जा रही है:
इंदौर के पॉश इलाके में एक बार फिर “विकास” का ढोल फूटा है… और इस बार आवाज़ आई है मलबे के नीचे से। एलिट अपेक्स और रेस कोर्स बिल्डिंग के पास बन रही उस निर्माणाधीन हाईराइज ने आज फिर शहर को शर्मसार कर दिया। महालक्ष्मी नगर MR-6 की तरफ की पिछली दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। धूल का गुबार उठा… लोग दहशत में भागे… और सवाल फिर वही क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?
याद कीजिए, यही वो जगह है जहां पिछली बार दीवार के साथ सड़क भी धंस गई थी। तब भी कहा गया था “जांच होगी”, “कार्रवाई होगी”, “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” लेकिन आज फिर दीवार गिर गई। तो क्या पिछली कार्रवाई सिर्फ कागज़ों में थी? क्या चेतावनी को अनसुना कर दिया गया? या फिर पैसों की चकाचौंध में सुरक्षा नियमों को दफना दिया गया? ये सिर्फ ईंट और सीमेंट का ढेर नहीं है, ये जिम्मेदारी का ढहना है। सवाल ठेकेदारों पर है। सवाल निगरानी करने वाली एजेंसियों पर है। और सबसे बड़ा सवाल आखिर किसकी शह पर ये लापरवाही बार-बार दोहराई जा रही है?
स्थानीय रहवासी गुस्से में हैं। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद काम नहीं रोका गया। क्या जान की कीमत इतनी सस्ती है? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी? आज दीवार गिरी है… कल अगर कोई मासूम इसकी चपेट में आ जाए तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या तब भी बयान आएगा “दुर्भाग्यपूर्ण घटना”? इंदौर पूछ रहा है विकास चाहिए या विनाश? कैमरे के सामने मुस्कुराते चेहरों से जवाब नहीं चलेगा। अब जवाब जमीन पर चाहिए… वरना अगली बार शायद सिर्फ दीवार नहीं गिरेगी, भरोसा भी पूरी तरह ढह जाएगा।







