इंदौर के चंदन नगर थाना क्षेत्र में बीती रात फिर वही हुआ, जिसका अंदेशा था असामाजिक तत्वों ने खुलेआम चुनौती दी और पुलिस तमाशबीन बनी रही। राजनगर, रामानंद नगर, नंदन नगर, दामोदर नगर और पंचमूर्ति नगर की गलियों में देर रात घरों के बाहर खड़ी कारों पर ईंटें बरसाई गईं। एक-दो नहीं, करीब एक दर्जन से ज्यादा वाहनों के कांच चकनाचूर कर दिए गए।
सवाल ये है कि बदमाश इतने बेखौफ कैसे हो गए? क्या उन्हें पता है कि रात में गश्त नाम की कोई चीज़ नहीं होती? क्या उन्हें भरोसा है कि कार्रवाई सिर्फ कागजों में होगी?
कुछ दिन पहले इसी इलाके की पुलिस चौकी पर पथराव हुआ था। तब वादे किए गए थे “सख्त कार्रवाई होगी”, “गश्त बढ़ाई जाएगी”, “असामाजिक तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।” लेकिन नतीजा? वही ढाक के तीन पात। बदमाशों ने फिर से वार किया और इस बार सीधे आम नागरिकों की जेब पर चोट की।
रहवासियों का गुस्सा अब फूटने लगा है। उनका कहना है कि इलाके में नशेड़ियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। रात होते ही गलियों में संदिग्ध लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है, लेकिन पुलिस की गाड़ी शायद किसी और रास्ते पर निकल जाती है।
ये पहली घटना नहीं है। कुछ महीने पहले भी इसी तरह कई गाड़ियों के कांच फोड़े गए थे। तब भी जांच हुई, आश्वासन मिला, लेकिन क्या किसी को सजा मिली? अगर मिली तो फिर ये दुस्साहस दोबारा कैसे हुआ?
आखिर कब तक आम लोग अपनी गाड़ियों को घर के बाहर खड़ा करने से डरते रहेंगे? कब तक टैक्स देने वाला नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करेगा?
चंदन नगर की ये रात सिर्फ कांच नहीं तोड़ गई ये पुलिस व्यवस्था पर भरोसे को भी चकनाचूर कर गई है। अब सवाल सिर्फ बदमाशों पर नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर है जो हर घटना के बाद “जांच जारी है” का राग अलापता है।
क्या इस बार भी फाइलें चलेंगी और मामला ठंडा पड़ जाएगा?
या फिर सच में कोई सख्त कदम उठेगा?
इंतजार सिर्फ कार्रवाई का नहीं है इंतजार उस दिन का है जब चंदन नगर की गलियों में कानून का खौफ बदमाशों के दिल में होगा, न कि रहवासियों के मन में।







