रीवा जिले में पुलिस महकमे की “ईमानदारी” का मुखौटा आखिरकार उतर ही गया। थाना मनगवां में एनडीपीएस एक्ट और 5/13 औषधि नियंत्रण अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई में कथित हेरफेर ने पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। मादक पदार्थों के खिलाफ सख्ती का दावा करने वाली पुलिस खुद कटघरे में खड़ी दिखाई दे रही है।
मामला सामने आते ही आला अधिकारियों को हरकत में आना पड़ा। गौरव राजपूत (पुलिस महानिरीक्षक), हेमंत चौहान (डीआईजी), शैलेन्द्र सिंह चौहान (एसपी) और संदीप मिश्रा (प्रभारी एसपी) के निर्देशन में जांच बैठाई गई। जांच में जो सामने आया, उसने पुलिस विभाग की छवि को झकझोर कर रख दिया।
प्रथम दृष्टया थाना मनगवां के कार्यवाहक निरीक्षक गजेन्द्र सिंह धाकड़, आरक्षक विजय यादव और आरक्षक बृजकिशोर अहिरवार का आचरण भ्रष्ट और संदिग्ध पाया गया। नतीजा तीनों को देर रात तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
एनडीपीएस में खेल? सख्ती के दावों की खुली पोल
मादक पदार्थों के मामलों में कार्रवाई का ढोल पीटने वाली पुलिस पर ही जब हेरफेर के आरोप लगें, तो सवाल उठना लाज़िमी है। शिकायत सीधे उच्च अधिकारियों तक पहुंची थी। अगर शिकायत न होती तो क्या ये “खेल” यूँ ही चलता रहता?
विभागीय जांच में अनियमितता के संकेत मिलते ही सस्पेंशन की तलवार चली, लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है। असली सवाल है क्या सिर्फ निलंबन से जवाबदेही तय हो जाएगी? या फिर कुछ समय बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
तीन पुलिसकर्मियों के एक साथ सस्पेंड होने से महकमे में हड़कंप है। अधिकारियों ने साफ संदेश दिया है कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं होगा। लेकिन जनता जानना चाहती है सिस्टम की सफाई कब होगी?
फिलहाल विभागीय जांच जारी है। अब देखना यह है कि यह कार्रवाई उदाहरण बनेगी या सिर्फ एक और “औपचारिक सख्ती” बनकर रह जाएगी।







