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पाकिस्तान से रिहा प्रसन्नजीत अमृतसर से बालाघाट रवाना, स्वर्ण मंदिर में टेका माथा

एक भूल, जो सात साल की जुदाई बन गई… और अब उसकी वापसी की राह शुरू हो चुकी है। भटकते हुए सीमा पार पाकिस्तान पहुंचे और वहां की सेंट्रल जेल में सात साल की सजा काटने वाले बालाघाट जिले के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी (38) आखिरकार अपने घर लौट रहे हैं। गुरुवार सुबह अमृतसर से वे स्वजनों के साथ बालाघाट के लिए रवाना हो गए।

बुधवार रात करीब 10 बजे स्वजन अमृतसर पहुंचे थे। मंजीठा थाना में महज 15 मिनट की कागजी प्रक्रिया के बाद अमृतसर पुलिस ने प्रसन्नजीत को परिजनों के सुपुर्द कर दिया। हस्ताक्षर पूरे हुए, औपचारिकताएं खत्म हुईं और सात साल से थमी एक कहानी को नया मोड़ मिल गया।

रात होटल में ठहरने के बाद गुरुवार सुबह सभी स्वर्ण मंदिर पहुंचे। वहीं प्रसन्नजीत ने मत्था टेका। मीडिया के सवाल पर उसकी आवाज में थकान कम और उम्मीद ज्यादा थी “मैं ठीक हूं… मेरी मां का ख्याल रखना, मैं आ रहा हूं। यह कहते हुए उसकी आंखों में घर लौटने की बेचैनी साफ दिखी।

इस दौरान एक दृश्य सबका ध्यान खींचता रहा। प्रसन्नजीत पाकिस्तानी पोशाक में नजर आया, कुर्ता-पायजामा, जो उसके बीते सात सालों की खामोश गवाही दे रहा था। बावजूद इसके, उसका व्यवहार सामान्य और शांत रहा।

अब सवाल यह है कि बालाघाट पहुंचने पर औपचारिक तौर पर उसे कलेक्टर कार्यालय ले जाया जाएगा या पुलिस अधीक्षक कार्यालय इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। फिलहाल स्वजन उसे बहन संघमित्रा के गांव महकेपार ले जाने की तैयारी में हैं।

अगर सब कुछ तय समय पर रहा, तो शुक्रवार रात तक प्रसन्नजीत बालाघाट की धरती पर होगा अपने गांव, अपनी मां और उस जिंदगी के पास, जिसका इंतजार सात साल से किया जा रहा है।

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