न्याय की लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार अदालत ने बड़ा फैसला सुना दिया है। एक समय प्रशासनिक ताकत का प्रतीक माने जाने वाले डिप्टी कलेक्टर को अब सलाखों के पीछे जाना होगा। अधीनस्थ महिला कर्मचारी से दुष्कर्म के गंभीर मामले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
माननीय तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रेखा चंद्रवंशी की अदालत ने आरोपी अभय सिंह खरारी को अलग-अलग धाराओं में कुल 10 वर्ष और 1 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने 1 लाख 1 हजार रुपये का भारी अर्थदंड भी लगाया है। आरोपी वर्तमान में उज्जैन में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ था।
पद का दुरुपयोग पड़ा भारी
2016 के मामले में आया ऐतिहासिक फैसला
अतिरिक्त लोक अभियोजन अधिकारी शिवपाल सिंह सिसोदिया के अनुसार यह मामला वर्ष 2016 का है, जब आरोपी उज्जैन में एसडीएम के पद पर कार्यरत था। उसी दौरान उसकी अधीनस्थ महिला कर्मचारी ने उस पर पद का दुरुपयोग कर यौन शोषण करने के गंभीर आरोप लगाए थे। पीड़िता ने साहस दिखाते हुए बड़वानी में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376 सहित अन्य गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज किया।
लंबी सुनवाई, गवाहों के बयान और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर गंभीर अपराध किया है। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पद की गरिमा का दुरुपयोग कर किया गया अपराध अत्यंत गंभीर है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है तो आरोपी को अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इस फैसले को प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक सख्त चेतावनी माना जा रहा है कि कानून के सामने कोई पद बड़ा नहीं होता।
पीड़िता को न्याय मिलने के बाद यह फैसला न केवल कानूनी बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी गहन चर्चा का विषय बना हुआ है।







