अमेरिकी राजनीति और वैश्विक व्यापार में आज नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया। 6-3 के बहुमत से सुनाए गए फैसले में कोर्ट ने साफ कहा कि अमेरिकी संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल संसद यानी कांग्रेस को है, राष्ट्रपति को नहीं।
लेकिन फैसले के महज तीन घंटे के भीतर ही ट्रम्प ने पलटवार करते हुए एक नया आदेश जारी कर दिया। शुक्रवार को हस्ताक्षरित इस आदेश के तहत दुनियाभर के देशों पर 10% का ग्लोबल टैरिफ लागू किया गया है, जो 24 फरवरी की आधी रात से प्रभावी होगा। इस तेजी से लिए गए फैसले ने न सिर्फ वॉशिंगटन बल्कि पूरी दुनिया की व्यापारिक बिरादरी को चौंका दिया है।
ट्रम्प ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कुछ जजों पर सवाल उठाते हुए कहा कि वे देश के लिए कलंक हैं और सही काम करने की हिम्मत नहीं रखते। राजनीतिक गलियारों में इस बयान को न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव के रूप में देखा जा रहा है।
भारत समेत कई देशों पर असर, ट्रेड डील पर क्या होगा आगे?
व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के हवाले से आई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के साथ व्यापार समझौते करने वाले देशों—जिनमें ब्रिटेन, भारत और यूरोपीय यूनियन शामिल हैं को अब 10% टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। इसका सीधा असर भारत पर भी पड़ेगा। पहले जहां भारत पर 18% टैरिफ लागू था, वहीं अब यह घटकर 10% रह जाएगा।
भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि इस समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को अपना अच्छा दोस्त बताते हुए कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार संबंध मजबूत बने रहेंगे।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसके बाद ट्रम्प के इस त्वरित कदम से संवैधानिक बहस और तेज हो सकती है। क्या कांग्रेस इस फैसले को चुनौती देगी? क्या फिर से कानूनी जंग छिड़ेगी? और सबसे अहम क्या वैश्विक बाजार इस नए 10% टैरिफ को सहजता से स्वीकार करेंगे या फिर व्यापारिक तनाव बढ़ेगा?
फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन पर टिकी हैं, जहां कानून, राजनीति और व्यापार—तीनों के बीच टकराव का नया अध्याय शुरू हो चुका है।







